23-24 अगस्त 2017 करेण्ट अफेयर्स

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Editorial Team

24 Aug, 2017

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कर्रेंट अफेयर्स,


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1) सर्वोच्च न्यायालय की 5-सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने 22 अगस्त 2017 को दिए एक ऐतिहासिक फैसले में “तीन तलाक” (यानि तीन बार तलाक कह कर पत्नी को तलाक दे देना) की प्रथा को असंवैधानिक करार देते हुए इसे समाप्त कर दिया। इस पीठ ने अपने फैसले में यह नहीं माना कि तीन तलाक की रिवायत को अनुच्छेद 25 के तहत संरक्षण मिलना चाहिए। इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष लाने वाली महिला कौन हैं? – शायरा बानो (Shayara Bano)

विस्तार: शायरा बानो (Shayara Bano) उत्तराखण्ड के काशीपुर की रहने वाली मुस्लिम महिला हैं तथा तीन तलाक अथवा ट्रिपल तलाक को असंवैधानिक करार देने के लिए उन्होंने ही सर्वोच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) वर्ष 2016 में दाखिल की थी। उन्हें अक्टूबर 2015 में उनके पति ने 14 वर्ष लम्बे विवाह के बाद ट्रिपल तलाक की प्रथा के तहत एकाएक तलाक देकर घर से निकाल दिया था।

उनके याचिका दायर करने के बाद देश के विभिन्न क्षेत्रों की तमाम अन्य पीड़ित महिलाओं ने भी सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन चूंकि शायरा बानो इस मामले में पहली याचिकाकर्ता थीं इसलिए यह मामला शायरा बानो बनाम भारतीय संघ (Shayara Bano versus the Union of India) के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

इस मुद्दे पर फैसला देने के लिए गठित सर्वोच्च न्यायालय की 5-सदस्यीय पीठ ने 2 के मुकाबले 3 मतों (3:2) से ट्रिपल तलाक को असंवैधानिक करार दिया। अपने आदेश में पीठ ने “तलाक-ए-बिद्दत” (तीन-तलाक) को धार्मिक स्वतंत्रता से सम्बन्धित संविधान के अनुच्छेद 25 का भाग नहीं माना है। हालांकि मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे.एस. खेहर (Chief Justice J.S. Khehar) और न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नज़ीर (Justice S. Abdul Nazeer) ने इससे अलग राय देते हुए “ट्रिपल तलाक” को अनुच्छेद 25 का हिस्सा माना लेकिन अन्य तीन न्यायाधीशों न्यायमूर्ति कूरियन जोसेफ (Justice Kurian Joseph), यू.यू. ललित (Justice U.U. Lalit) और रोहिन्टन फली नरीमन (Justice Rohinton Fali Nariman) ने ट्रिपल तलाक को पूर्णतया असंवैधानिक माना।

अपने निर्णय में न्यायमूर्ति जस्टिस कूरियन ने माना कि तुरंत तलाक देने की यह प्रथा कुरआन की आयतों के खिलाफ है। न्यायमूर्ति यू.यू. ललित ने इसका समर्थन किया। कूरियन ने कहा कि 1400 वर्षों से ट्रिपल तलाक की परंपरा कायम है, सिर्फ इस तथ्य के आधार पर इसे अनुच्छेद 25 का हिस्सा नहीं माना जा सकता है।

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2) केन्द्र सरकार ने 23 अगस्त 2017 को अन्य पिछड़ा वर्गों (OBCs) के लिए तय क्रीमी लेयर की सीमा (creamy layer ceiling) को बढ़ाकर कितना कर? – 8 लाख रुपए वार्षिक

विस्तार: केन्द्रीय किबिनेट ने 23 अगस्त 2017 को अन्य पिछड़ा वर्गों (Other Backward Classes – OBCs) को प्रदत्त आरक्षण हेतु क्रीमी लेयर की आय सीमा को वर्तमान 6 लाख रुपए वार्षिक से बढ़ाकर 8 लाख रुपए वार्षिक कर दिया। इसका अर्थ हुआ कि अब ओबीसी कोटे के तहत केन्द्रीय नौकरियों में आरक्षण का लाभ 8 लाख रुपए वार्षिक से कम आय वाले वर्ग को ही मिलेगा।

केन्द्र सरकार के अनुसार देखा गया है कि इस वर्ग में आरक्षित सीटों हर साल बड़ी मात्रा में खाली रह जाती हैं और इसका फायदा किसी को नहीं मिल पाता है। अब इस निर्णय से इस कोटे के तहत आरक्षण पाने वाले अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सकेगा।

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3) रेलवे बोर्ड (Railway Board) के अध्यक्ष (Chairman) पद से ए.के. मित्तल (A.K. Mittal) द्वारा इस्तीफा दिए जाने के बाद 23 अगस्त 2017 को इस पद पर किसकी नियुक्ति केन्द्र सरकार द्वारा की गई? – अश्विनी लोहानी (Ashwani Lohani)

विस्तार: एयर इण्डिया (Air India) के अध्यक्ष व प्रबन्ध निदेशक (CMD) के रूप में तैनात अश्विनी लोहानी (Ashwani Lohani) को केन्द्र सरकार ने 23 अगस्त 2017 को रेलवे बोर्ड (Railway Board) का नया अध्यक्ष बना दिया। उन्होंने ए.के. मित्तल का स्थान लिया है जिन्होंने एक दिन पूर्व इस पद से इस्तीफा दे दिया था।

मीडिया की कुछ रिपोर्टों के अनुसार मित्तल ने 19 अगस्त 2017 को मुजफ्फरनगर में पुरी और हरिद्वार के बीच चलने वाली कलिंग-उत्कल एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए 22 अगस्त 2017 को अपने पद से इस्तीफा दिया है।

उल्लेखनीय है कि अश्विनी लोहानी भारतीय रेल की मैकेनिकल इंजीनियरिंग सर्विस (IRSME) काडर के अधिकारी हैं तथा इससे पहले उन्होंने रेलवे में कई वरिष्ठ पदों पर कार्य किया है – जैसे डीआरएम (दिल्ली डिवीज़न), निदेशक, राष्ट्रीय रेल संग्रहालय तथा मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, रेल वैकल्पिक ऊर्जा विभाग। दुनिया की सबसे पुरानी भाप के इंजन से चालित ट्रेन “फेयरी क्वीन एकसप्रेस” (‘Fairy Queen Express’) को इतने लम्बे समय तक परिचालित करने के लिए उन्हें गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड का प्रमाणपत्र भी मिल चुका है।

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4) भारतीय नाविकों (India seafarers) को अवैध तरीके से अपंजीकृत एजेंटों द्वारा काम करने के लिए विदेश भेजने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए नौवहन महानिदेशालय (Director General of Shipping – DGS) ने अगस्त 2017 के दौरान किस उपाय को लागू करने की घोषणा की? – विदेश जाने वाले भारतीय नाविकों के आंकड़ों की पड़ताल के लिए एक अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर

विस्तार: नौवहन क्षेत्र (maritime) में भारत सरकार की नियामक संस्था नौवहन महानिदेशालय Director General of Shipping – DGS) ने एक अत्याधुनिक ई-माइग्रेशन सॉफ्टवेयर (e-migrate software) तैयार करने की घोषणा अगस्त 2017 के दौरान की। इसको भारत सरकार के विदेश मंत्रालय से सम्बद्ध उपक्रम प्रोटेक्टर ऑफ एमिग्रेण्ट्स (Protector of Emigrants – PoE) के सुझावों के अनुरूप बनाया गया है।

इस सॉफ्टवेयर के द्वारा विदेश जाने वाले भारतीय नाविकों के समस्त आंकड़ों को आसानी से कैप्चर किया जा सकेगा तथा ऐसे नाविकों तथा उन्हें अवैध तरीके से सेवायोजन प्रदान कर भेजने वाली एजेंसियों का पता लगाया जा सकेगा जो अपंजीकृत हैं।

उल्लेखनीय है कि पिछले काफी समय से तमाम एजेंट तथा एजेंसियाँ भारतीय नाविकों को अवैध तरीके से काम के लिए विदेश भेजती हैं तथा पकड़े जाने पर ऐसे नाविकों को स्वयं जद्दोजेहद करनी पड़ती है।

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5) आर्थिक मामलों पर गठित कैबिनेट समिति (CCEA) ने 23 अगस्त 2017 को घाटा झेल रहे किस केन्द्र सरकार के उपक्रम (loss-making PSU) को बंद करने के प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी प्रदान कर दी? – भारत वैगन एण्ड इंजीनियरिंग कम्पनी लिमिटेड (Bharat Wagon and Engineering Company Limited – BWEL)

विस्तार: आर्थिक मामलों पर गठित कैबिनेट समिति (CCEA) ने केन्द्र सरकार के उपक्रम भारत वैगन एण्ड इंजीनियरिंग कम्पनी लिमिटेड ((Bharat Wagon and Engineering Company Limited – BWEL) को बंद करने के प्रस्ताव को 23 अगस्त 2017 को अपनी अंतिम मंजूरी प्रदान कर दी। यह उपक्रम पिछले काफी समय से काफी घाटा झेल रहा है।

1978 में संस्थापित यह उपक्रम भारतीय रेल के लिए वैगन (मालगाड़ी के डिब्बे) बनाने में संलग्न है। लेकिन पिछले 10 सालों से लगातार हो रहे घाटे तथा खराब वित्तीय स्थिति को देखते हुए इसे बंद करने का निर्णय केन्द्र सरकार ने लिया है।

केन्द्र सरकार द्वारा इस सम्बन्ध में मंजूर प्रस्ताव के अनुसार भारत वैगन एण्ड इंजीनियरिंग लिमिटेड के 626 कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (VRS) का लाभ वर्ष 2007 के वेतनमान के अनुसार मिलेगा। इसके लिए केन्द्र सरकार एक बार की 151.8 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता उपक्रम को प्रदान करेगी जिसका उपयोग कर्मचारियों के सेवा छोड़ने के पैकेज (severance package) तथा उपक्रम की निवर्तमान देनदारियों को चुकाने में किया जायेगा।

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