14-15 दिसम्बर 2016 करेण्ट अफेयर्स

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15 Dec, 2016

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कर्रेंट अफेयर्स,


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venezuela-demone-2016

1) किस दक्षिण अमेरिकी देश ने अपनी सबसे मूल्यवान करेंसी मुद्रा के विमुद्रीकरण (demonetization) करने का आदेश 11 दिसम्बर 2016 को जारी कर दिया ताकि मुद्रा को अवैध तरीके से रखने वालों तथा भारी मुद्रास्फीति (inflation) की समस्या का सामना किया जा सके? – वेनेजुएला (Venezuela)

विस्तार: वेनेजुएला (Venezuela) के राष्ट्रपति नोकोलस मडूरो (Nicolas Maduro) ने 11 दिसम्बर 2016 को एक आपातकालीन आदेश पर हस्ताक्षर कर देश की सबसे अधिक मूल्य की करेंसी मुद्रा 100 बॉलिवर (100 bolivar) के नोट को प्रचलन से बाहर कर दिया। सरकार का मानना है कि उसके इस कदम के द्वारा पड़ोसी देश कोलम्बिया (Colombia) समेत तमाम अन्य देशों में मुद्रा का अवैध भण्डारण करने वाले माफिया तथा अन्य गुटों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

उल्लेखनीय है कि वेनेजुएला वर्तमान में अपने सबसे कठिन आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है तथा यहाँ की गिनती सर्वाधिक मुद्रास्फीति वाले देशों में की जाती है। अब यहाँ नए उच्च मूल्य के करेंसी नोटों को जारी करने की तैयारी चल रही है जिनका मूल्य वर्तमान नोटों के मुकाबले लगभग 200 गुना अधिक होगा। जहाँ तक 100 बॉलिवर के नोट की कीमत की बात है तो इसका बाजार मूल्य इतना ही है कि इससे एक टॉफी खरीदी जा सके।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भविष्यवाणी की है कि वेनेजुएला में मुद्रास्फीति इस वर्ष के अंत तक 475% तक पहुँच सकती है। वेनेजुएलाई अर्थव्यवस्था का आधार तेल निर्यात (oil export) है लेकिन इसके कम मूल्य के कारण देश में डॉलर की आवाक काफी कम हो गई है। इससे देश को अनाज, दवाएं तथा अन्य महत्वपूर्ण उत्पादों को अधिक मूल्य देकर आयातित करना पड़ रहा है जो बढ़ती महंगाई का प्रमुख कारण है।

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2) डिज़िटल भुगतान के ढांचे (digital payments structure) को मजबूत करने के लिए सिफारिशें देने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा गठित वटल समिति (Vatal Committee) ने दिसम्बर 2016 के दौरान अपनी रिपोर्ट सरकार को पेश की। इस रिपोर्ट में की गई सबसे बड़ी सिफारिश क्या है? – डिज़िटल भुगतान के लिए RBI तहत ही एक स्वतंत्र नियामक संस्था (independent regulatory body) का गठन किया जाय

विस्तार: भारत को कैशलेस अर्थव्यवस्था में तब्दील करने के लिए डिज़िटल भुगतान ढांचे को मजबूत करने के लिए सिफारिशें प्रदान करने के लिए केन्द्र सरकार ने अगस्त 2016 के दौरान एक समिति का गठन किया था। इस समिति की अध्यक्षता पूर्व वित्त सचिव रतन वटल (Ratan Watal) कर रहे थे। उक्त समिति ने अपनी रिपोर्ट दिसम्बर 2016 के दौरान केन्द्र सरकार को सौंप दी है।

समिति की सबसे महत्वपूर्ण सिफारिश यह है कि डिज़िटल भुगतान सम्बन्धी नियमन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के ढांचे के तहत ही एक स्वतंत्र नियामक संस्था का गठन किया जाना चाहिए। इसके लिए भुगतान नियामक बोर्ड (Payments Regulatory Board – PRB) की स्थापना RBI की परिधि के भीतर करने की सिफारिश समिति ने की है। सिफारिशों के अनुसार उक्त बोर्ड को एक स्वायत्त संस्था होना चाहिए तथा इसमें कुछ सदस्य RBI के बाहर के भी होने चाहिए।

वटल समिति ने यह सिफारिश भी की है कि डिज़िटल भुगतान का ढांचा ऐसा होना चाहिए कि इसमें उपभोक्ता संरक्षण की व्यवस्था हो तथा इससे भुगतान व निपटारा कानून (Payment and Settlements Act) को और मजबूती प्राप्त हो। इसमें ऐसी व्यवस्था हो की अवैध लेन-देन होने पर उपभोक्ता को आर्थिक नुकसान न झेलना पड़े तथा शिकायतों के लिए ग्राहक की नियामक तक पहुँच हो। इसके अलावा डेटा को संरक्षित रखने व सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है।

वटल समिति ने अपनी रिपोर्ट में पेमेण्ट्स प्रणालियों के लिए आरटीजीएस (RTGS) जैसी व्यवस्था स्थापित करने की बात भी कही है जिसमें गैर-बैंकिंग भुगतान सेवा प्रदत्ताओं को भी जोड़ा जा सके।

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3) दिसम्बर 2016 के दौरान जारी की गई आईएचएस जेन (IHF Jane) की नवीनतम रक्षा बजट रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2016 में विश्व में प्रतिरक्षा पर सर्वाधिक व्यय करने वाले देशों में भारत (India) का क्या स्थान रहा? – चौथा (fourth)

विस्तार: आईएचएस जेन (IHF Jane) की नवीनतम वार्षिक रक्षा बजट रिपोर्ट (Annual Defense Budgets Report) के अनुसार भारत ने प्रतिरक्षा क्षेत्र में व्यय करने के मामले में सऊदी अरब और रूस को पीछे छोड़कर चौथा स्थान हासिल कर लिया है। वर्ष 2016 के दौरान भारत ने रक्षा क्षेत्र पर 50.67 अरब डॉलर ($50.67 billion) खर्च किया है जबकि वर्ष 2015 में उसका इस क्षेत्र पर किया गया कुल खर्च 46.6 अरब डॉलर था। रिपोर्ट के अनुसार यदि ब्रिटिश मुद्रा पाउण्ड की कीमत में इसी प्रकार गिरावट जारी रही तो भारत वर्ष 2018 तक ब्रिटेन को प्रतिरक्षा खर्च के मामले में पछाड़ सकता है।

वहीं अमेरिका 2016 में 622 अरब डॉलर ($622 billion) खर्च कर दुनिया में सबसे अधिक प्रतिरक्षा खर्च करने वाले देश के रूप में कायम है। उसकी वैश्विक रक्षा खर्च में लगभग 40% हिस्सेदारी रही। इसके बाद चीन (China) का स्थान रहा जिसने 191.75 अरब डॉलर ($191.75 billion) इस क्षेत्र पर खर्च किया। ब्रिटेन (Britain) प्रतिरक्षा क्षेत्र पर 53.81 अरब डॉलर ($53.81 billion) खर्च कर तीसरे स्थान पर रहा। वहीं भारत के बाद क्रमश: सऊदी अरब (Saudi Arabia) और रूस (Russia) का स्थान रहा।

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2015 में प्रतिरक्षा पर हुए 1.55 ट्रिलियन डॉलर ($1.55 trillion) के मुकाबले वर्ष 2016 में 1.57 ट्रिलियन डॉलर ($1.55 trillion) का खर्च हुआ है। खर्च में वृद्धि का मुख्य कारण एशियाई देशों में वृद्धि रही जिसका एक बड़ा कारण दक्षिण चीन सागर में जारी तनाव रहा।

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aleppo-2016

4) दिसम्बर 2016 के दौरान सीरिया (Syria) में राष्ट्रपति बशर अल-असद के नियंत्रण वाली सरकारी सेना ने किस महत्वपूर्ण शहर के बड़े हिस्से पर पुन: अपना कब्जा जमाने में सफलता हासिल की, जोकि वर्ष 2012 में उनके हाथों से निकल गया था? – अलेप्पो (Aleppo)

विस्तार: अलेप्पो (Aleppo) युद्धग्रस्त सीरिया का सबसे बड़ा शहर है। वर्ष 2012 से यह शहर राष्ट्रपति बशर अल-असद (President Bashar al-Assad) के नियंत्रण वाली सरकारी फौजों तथा विरोधी गुटों के बीच संघर्ष का केन्द्र बिन्दु रहा है। फ्री सीरियन आर्मी और सुन्नी लड़ाकों के नेतृत्व में लड़ रहे विरोधियों ने इस शहर को 19 जुलाई 2012 को अपने कब्जे में लेकर सीरियाई सरकार को एक बड़ा झटका दिया था।

13 दिसम्बर 2016 तक इस शहर के पूर्व में स्थित अधिकांश हिस्से पर सरकारी सेनाओं का नियंत्रण हो गया और माना जा रहा है अब पूरे अलेप्पो शहर पर उनका कब्जा कुछ सप्ताह में हो जायेगा। सीरिया के संघर्ष को रूस का साथ मिला है जिसने इस शहर में तैनात विरोधी खेमे पर बड़े हवाई हमले किए थे।

इस जीत के बाद अलेप्पो के विरोधी गुटों और रूसी सेना के बीच वार्ता के बाद युद्धविराम की घोषणा भी की गई है, हालांकि संयुक्त राष्ट्र ने इसकी पुष्टि नहीं की है। इस मसले पर विचार करने के लिए सं. रा. सुरक्षा परिषद की एक आपातकालीन बैठक 13 दिसम्बर 2016 को आयोजित की गई। अलेप्पो के लिए 4 वर्ष से अधिक लम्बा चला युद्ध एक भीषण मानवीय आपदा बनकर आया है। विरोधी गुट सरकारी सेना को अन्धाधुंध गोलाबारी कर भारी संख्या में नागरिकों की हत्या का दोषी बताते रहे हैं जबकि सरकार का कहना है कि शहर को आतंकियों के चंगुल से छुड़ाने का उसके पास इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था।

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5) भारत का कौन सा स्टेडियम मेलबर्न क्रिकेट ग्राउण्ड (MCG) को पीछे छोड़कर दर्शक क्षमता के लिहाज से दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट /स्टेडियम बनने की राह पर अग्रसर है? – सरदार पटेल क्रिकेट स्टेडियम (अहमदाबाद)

विस्तार: अहमदाबाद (Ahmedabad) के मोटेरा (Motera) स्थित सरदार पटेल क्रिकेट स्टेडियम (Sardar Patel Cricket Stadium) दो साल के भीतर दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम बनकर उभरेगा (दर्शक क्षमता के अनुसार)। ऑस्ट्रेलिया का विश्वप्रसिद्ध मेलबर्न क्रिकेट ग्राउण्ड (Melbourne Cricket Ground – MCG) इस समय दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम है। सरदार पटेल स्टेडियम में नई दर्शक दीर्घा बनाने का काम एल एण्ड टी (L&T) को सौंपा गया है तथा यह फर्म अगले दो साल के भीतर यह काम पूरा कर लेगी।

मेलबर्न क्रिकेट ग्राउण्ड की क्षमता 100,024 दर्शकों को बैठाने की है तथा दो साल के बाद सरदार पटेल क्रिकेट स्टेडियम की क्षमता 1,10,000 दर्शकों की हो जायेगी। इस स्टेडियम की वर्तमान क्षमता 54,000 दर्शकों की है।

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